माँ कामाख्या देवी

Home  >  माँ कामाख्या देवी

माँ कामाख्या देवी

52 सिद्ध पीठों तथा समस्त ब्रम्हाण्ड के तंत्र , सम्मोहन, वशीकरण, स्तंभन , की अधिष्ठात्री देवी माँ कामाख्या के श्री चरणों में हम कोटी कोटी प्रणाम करते हैं , पूर्वोत्तर भारत के राज्य असाम में गुवाहाटी क्षेत्र के अंतर्गत नीलाञ्चल पर्वत के शिखर पर विराजमान भगवती कामाख्या 52 सिद्ध पीठ तथा सम्पूर्ण तंत्र विद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं,

यहाँ मनुष्य कुछ वर्ष माता की साधना करके तुरित तंत्र माया को प्राप्त कर लेता है परंतु साधना करते वक्त मनुष्य का भाव निष्काम होना चाहिए , माँ कामाख्या देवी का प्रादुर्भाव माता शती के शरीर छोड़ जाने के उपरांत भगवान शंकर जी के द्वारा उनके शरीर को अपने कंधे पर रख कर समस्त ब्रम्हांड में व्योग एवं करुणक्रंदना करते वक्त श्री हरी विष्णु जी के सुदर्शन चक्र के द्वारा माता कामाख्या के साथ साथ 51 सिद्ध पीठों का प्रादुर्भाव हुआ ।।

यदी कोई स्त्री किसी पुरूष को अपने पती के रूप में प्राप्त करना चाहती हो तो बह माता कामाख्या की आराधना करे ,माता कामाख्या का सूक्ष्म अनुष्ठान 11000 मंत्रों का होता है जिसमें मुख्य आचार्य के साथ दो उपाचार्य का होना अनिवार्य है तथा यह अनुष्ठान त्रिदिवसीय ( तीन दिन ) का होता है , तथा पूर्ण अनुष्ठान 125000 ( सवा लाख ) मंत्रो का अनुष्ठान 11 दिन 2 आचार्य 9 उपाचार्यों के साथ पूर्ण होता है जो समय से पूर्व समस्त मनोरथ पूर्ण करता है ।।

कामाख्ये कामसम्पन्ने , कामेश्वरी हरि प्रिये । कामनाम्देहिमे नित्यम् , कामेश्वरी नमोस्तुऽते ।।

माँ कामाख्या देवी का कथा

शिव महापुराण अनुसार माँ सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति, महादेव शिव को अपने दामाद के रूप में स्वीकार नहीं थे। परन्तु पुत्री प्रेम में विवश हो कर उन्होंने इस विवाह की स्वीकृति दे दी। विवाह के कुछ समय पश्च्यात जब राजा दक्ष ने अपने महल में एक यज्ञ समारोह आयोजित किया, भगवान शिव ने माँ सती को सलाह दी की उनका वहां जाना सही नहीं है। पर माँ सती नहीं मानी।

माँ सती को यज्ञ समारोह में देख, राजा दक्ष के मुख से महादेव शिव के लिए अपशब्द निकल गए, जिसे सुनकर माँ सती से सहा ना गया और उन्होंने यज्ञ कुंड में कूद कर आत्मा दाह कर दिया। यह देख क्रोधित महादेव शिव माँ सती के जले हुए शव को कंधे पे उठा कर तांडव करने लगे और दुनिया का विनाश होने लगा।

सभी देवों ने भगवान् विष्णु से मदद मांगी। भगवान विष्णु ने महादेव शिव के मन से माँ सती का मोह भंग करने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माँ सती के 51 टुकड़े कर दिए। उनके जले हुए अंग धरती पर जहाँ जहाँ गिरे, वही शक्ति पीठ बन गए और देविक शक्तियों ने अवतरण लिया।

माँ कामाख्या देवी का उत्पन उस शक्तिपीठ पीठ से हुआ जहाँ माँ सती की योनि और गर्भ गिरे थे।

संबंध

यह आपके रिश्ते के मामलों में आपकी मदद करेगा आपके साथी के साथ आपके सभी विश्वास/संगतता के मुद्दों का समाधान किया जाएगा यह आपके प्यार और रिश्ते में गलतफहमियों को दूर करने में भी मदद करेगा

संबंध

विवाह की समस्या में देरी का सामना कर रहे लोगों के लिए कामाख्या पूजा बहुत मददगार है। माँ कामाख्या देवी इस संबंध में सभी समस्याओं को हल करने के लिए जानी जाती हैं यह आपके और आपके साथी के बीच वैवाहिक विवादों को सुलझाने में भी मदद करता है यह अंतरजातीय विवाह के मामलों में आपकी मदद करेगा

माता कामाख्या 2100 पाठ

माँ कामाख्या के 2100 पाठ से कराया गया अनुष्ठान सूक्ष्मरूपी फल देता है। जिसकी आपको आवश्यकता होगी बही कार्य सिद्ध होगा ।।

Rs. 21,000

माता कामाख्या सवा लाख जाप

माँ कामाख्या के 125000 जाप से कराया गया अनुष्ठान यश , वैभव , धन , ऐश्वर्य , समृद्धि , आदि प्रदान करता है ।।

Rs. 81,000

माता कामाख्या सम्पूर्ण कवच

समस्त वस्तुएँ सवा लाख मंत्र एवं विशेष पूजन के द्वारा सिद्ध की गयी हैं ,इन समस्त वस्तुओं के उपयोग से आप अपने व्यापार से संबंधित परेशानी को दूर कर सकते हैं ,ये वस्तुएँ आपके जीवन में उन्नति एवं उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करेंगी ।।

Rs. 51,00

सर्व कार्य सिद्धि हेतु हवन

राजस यज्ञ सात्विक होता है , जिसे समस्त लोग कर सकते हैं , तामस यज्ञ सात्विक नहीं होता है तथा उसमें ड़लने वाली आहुति भी सात्विक नहीं होती हैं , तथा तानस यज्ञ जिसे तांत्रिक क्रिया से किया जाता है , इस यज्ञ में भी सात्विक आहुति नहीं ड़लती ,

Rs. 11,000